बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य, इस कारण खो जाते थे प्लेन और जहाज!

डेस्क। बरमूडा ट्राएंगल दुनियाभर के देशों के लिए आज भी पहेली बना हुआ है। यहां से गुजरने वाले कई समुद्री जहाज और हवाई जहाज रहसयमय रूप से गायब हो चुके हैं। लेकिन आज तक न तो किसी जहाज का मलबा मिला और न ही अन्य कोई ठोस सबूत। हालांकि समय समय पर बरमूडा ट्राएंगल की अलग अलग थ्योरी सामने आती रही है। इन अलग अलग थ्योरियों पर बात करने से पहले जरुरी है आख़िर बरमूडा ट्राएंगल क्या है? दरअसल, बरमूडा ट्राएंगल उत्तर अटलांटिक महासागर का हिस्सा है। इसे ‘डेविल्स ट्राएंगल’ या ‘शैतानी त्रिभुज’ के नाम से भी जाना जाता है।

सबसे पहले कोलंबस ने देखा
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि बरमूडा ट्राएंगल का जिक्र सबसे पहले यूरोप को अमेरिकी महाद्वीप से वाकिफ कराने वाले क्रिस्टोफर कोलंबस किया था। उन्होंने अपने लेखों में दावा किया था जब वह अमेरिकी महाद्वीप की खोज में निकले थे तो बरमूडा ट्राएंगल के समीप पहुंचकर उनके कम्पास (दिशा बताने वाला यंत्र) ने अचानक काम बंद कर दिया। इसलिए उनका संपर्क टूट गया था। इसी समय उन्होंने आसमान में एक रहस्यमयी आग का गोला देखा। जो एक तेज धमाके के साथ समुद्र में गिर गया।

टाइम जोन का एक छोर
बरमूडा ट्राएंगल की गुत्थी सुलझाने के कई वैज्ञानिक और खोजकर्ता लगे हैं। जो समय समय पर अपनी रिसर्च का खुलासा करते हैं। एक रिसर्च के मुताबिक बरमूडा ट्राएंगल एक रहस्य नहीं बल्कि टाइम जोन का एक छोर है। जो कि धरती पर एक ब्लैक होल की तरह है। यानी बरमूडा ट्राएंगल के एरिया में एक ख़ास तरह के हालात कायम हो जाते हैं। दरअसल, यहां वर्तमान से पिछले कई सालों बाद चले जाना। उदाहरण के लिए आप दिल्ली में हो और अचानक कुछ ऐसा हो जाए जिससे आप महाभारत के दौर में चले जाएं जहाँ कौरवों-पांडवों की लड़ाई चल रही हो। इस टाइम जोन का उपयोग धरती नहीं बल्कि किसी और दुनिया के लोग यानी एलियंस करते हैं। बरमूडा ट्राएंगल के इस क्षेत्र में साल में 25 बार ऐसा होता है कि जो यहाँ से गुजरता है उसे भयंकर शक्तिशाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें अपनी ओर खींच लेती है।

शक्तिशाली चुंबक खींचती है
एक थ्योरी यह भी है कि बरमूडा ट्राएंगल के ऊपर ‘किलर क्लाउड्स’ यानी जानलेवा बादल छाये रहते हैं। इन बादलों के अंदर कई तूफ़ान उठते हैं। इन बादलों में जैसे ही प्लेन पहुंचता है वैसे ही यह बैलेंस खो देता है। इस वजह से उसमें धमाकेदार विस्फोट हो जाता है। वहीं कई वैज्ञानिकों का दावा है कि इस आइलैंड पर कई एयर बम हैं। इस वजह से तेजी से हवाएं चलती है। इन तेज हवाओं की चपेट में जो आता है उसमें विस्फोट हो जाता है। वहीं कुछ रिपोर्ट में दावा है कि बरमूडा ट्राएंगल के क्षेत्र में वहां काफी तेज चुम्बकीय शक्ति मौजूद है। इस वजह जो इसकी चपेट में आता है वह समुद्र की तह में चला जाता है।

अमेरिका की लैबोरेटरी
एक दावा यह भी किया जाता है कि बरमूडा ट्रायंगल क्षेत्र में अमेरिका की एक बहुत बड़ी सीक्रेट लैबोरेटरी है। इस में लैबोरेटरी में अमेरिका एटम परीक्षण समेत अन्य गतिविधियां करता है। इसलिए वह नहीं चाहता है कि इस जगह पर कोई और देश गुजरे हैं। इसलिए दुनिया के अन्य देशों को डराने के लिए उसने यह एक साजिश रची है।

बरमूडा त्रिकोण में लापता हुए जहाज-
1872 में जहाज ‘द मैरी सैलेस्ट’ बरमूडा त्रिकोण में लापता हुआ, जिसका आजतक कुछ पता नहीं।
1945 में नेवी के पांच हवाई जहाज बरमूडा त्रिकोण में समा गए। ये जहाज फ्लाइट-19 के थे।
1947 में सेना का सी-45 सुपरफोर्ट जहाज़ बरमूडा त्रिकोण के ऊपर रहस्यमय तरीके से गायब हो गया।
1948 में जहाज ट्यूडोर त्रिकोण में खो गया। इसका भी कुछ पता नहीं। (डीसी-3)
1950 में अमेरिकी जहाज एसएस सैंड्रा यहां से गुजरा, लेकिन कहां गया कुछ पता नहीं।
1952 में ब्रिटिश जहाज अटलांटिक में विलीन हो गया। 33 लोग मारे गए, किसी का शव तक नहीं मिला।
1962 में अमेरिकी सेना का केबी-50 टैंकर प्लेन बरमूडा त्रिकोण के ऊपर से गुजरते वक्त अचानक लापता हुआ।
1972 में जर्मनी का एक जहाज त्रिकोण में घुसते ही डूब गया। इस जहाज़ का भार 20 हज़ार टन था।
1997 में जर्मनी का विमान बरमूडा त्रिकोण में घुसते ही कहां गया, कुछ पता नहीं।

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