हम तुमसे जुदा होके..जैसे अलहदा गीत लिखने वाले असद भोपाली के 10 प्रसिद्ध शेर, पढ़िए

डेस्क। हम तुमसे जुदा होके ..जैसे अलहदा गीत लिखने वाले असद भोपाली का जन्म 10 जुलाई 1921 को मध्यप्रदेश के भोपाल में हुआ था। उनके पिता का नाम मुंशी अहमद खान था। असद उनके पिता की पहली औलाद थीं। उनके बचपन का नाम का असादुल्लाह खान था। भोपाली ने फ़ारसी, अरबी, उर्दू और अंग्रेजी भाषा में शिक्षा ली। उन्हें साल 1990 में ‘मैंने प्यार किया’ के लिए लिखे गीत ‘कबूतर जा जा जा’ के लिए प्रतिष्ठित फ़िल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया। आइये पढ़ते हैं उनके शेर –

(1)

इतना तो बता जाओ ख़फ़ा होने से पहले

वो क्या करें जो तुम से ख़फ़ा हो नहीं सकते

(2)

हालात ने किसी से जुदा कर दिया मुझे

अब ज़िंदगी से ज़िंदगी महरूम हो गई

(3)
जब ज़रा रात हुई और मह ओ अंजुम आए

बार-हा दिल ने ये महसूस किया तुम आए

(4)
न बज़्म अपनी न अपना साक़ी न शीशा अपना न जाम अपना

अगर यही है निज़ाम-ए-हस्ती तो ज़िंदगी को सलाम अपना

(5)
ये आँसू ढूँडता है तेरा दामन

मुसाफ़िर अपनी मंज़िल जानता है

(6)
न आया ग़म भी मोहब्बत में साज़गार मुझे

वो ख़ुद तड़प गए देखा जो बे-क़रार मुझे

(7)
ग़ुंचा ओ गुल माह ओ अंजुम सब के सब बेकार थे

आप क्या आए कि फिर मौसम सुहाना आ गया

(8)
देखिए अहद-ए-वफ़ा अच्छा नहीं

मरना जीना साथ का हो जाएगा

(9)
फ़र्क़ इतना है कि तू पर्दे में और मैं बे-हिजाब

वर्ना मैं अक्स-ए-मुकम्मल हूँ तिरी तस्वीर का

(10)
ऐसे इक़रार में इंकार के सौ पहलू हैं

वो तो कहिए कि लबों पे न तबस्सुम आए

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