Ek Kavita : नासिर काज़मी की फेमस ग़ज़ल ‘ नए कपड़े बदल कर जाऊं कहाँ…

डेस्क। नासिर काज़मी का जन्म भारत के शहर अंबाला में पैदा हुए थे। लेकिन 1947 में बंटवारें के समय वे पाकिस्तान चले गए थे। देश के बंटवारे ने उन्हें तोड़कर रख दिया था। इसलिए उनकी गज़लें बंटवारे के इर्द गिर्द केंद्रित थीं। काज़मी को आधुनिक उर्दू ग़ज़ल का पुरोधा कहा जाता है। उनकी ये ग़ज़ल काफी मशहूर हुई थीं –

नए कपड़े बदल कर जाऊँ कहाँ…….-नासिर काज़मी

नए कपड़े बदल कर जाऊँ कहाँ और बाल बनाऊँ किस के लिए

वो शख़्स तो शहर ही छोड़ गया मैं बाहर जाऊँ किस के लिए

जिस धूप की दिल में ठंडक थी वो धूप उसी के साथ गई

इन जलती बलती गलियों में अब ख़ाक उड़ाऊँ किस के लिए

वो शहर में था तो उस के लिए औरों से भी मिलना पड़ता था

अब ऐसे-वैसे लोगों के मैं नाज़ उठाऊँ किस के लिए

अब शहर में उस का बदल ही नहीं कोई वैसा जान-ए-ग़ज़ल ही नहीं

ऐवान-ए-ग़ज़ल में लफ़्ज़ों के गुल-दान सजाऊँ किस के लिए

मुद्दत से कोई आया न गया सुनसान पड़ी है घर की फ़ज़ा

इन ख़ाली कमरों में ‘नासिर’ अब शम्अ जलाऊँ किस के लिए

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